छात्रों की सुरक्षा: शिक्षा के रंग-मंच पर एक नई कदम(आत्महत्या और मानसिक तनाव पे मुख्य Guideline)

सदियों से शिक्षा हमारे समाज के रूप और विकास के महत्वपूर्ण घटक रही है। यह विचार, शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कई महत्वपूर्ण कदमों के साथ अब नई दिशा में बदल चुका है, जिसका उद्देश्य है छात्रों के जीवन को खुशी और सफलता से भर देना।

छात्रों की सुरक्षा: शिक्षा के रंग-मंच पर एक नई कदम(आत्महत्या और मानसिक तनाव पे मुख्य Guideline)
Guideline

नाकामयाबी की तनाव और आत्महत्या से जुड़ी चिंताओं का समाधान

आज के समय में, छात्रों के जीवन में तनाव की मात्रा में वृद्धि देखी जा रही है, और इसके साथ ही आत्महत्या के मामले भी बढ़ रहे हैं। इस परिस्थिति को समझते हुए, शिक्षा मंत्रालय ने छात्रों के आत्महत्या से बचाव के लिए पहली Guideline ‘उम्मीद’ तैयार की है, जिसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को सार्थक और खुशी भरा जीवन जीने की दिशा में मदद करना है।

स्कूली छात्रों की दबावों से आत्महत्या के खतरे को दूर करें

केंद्र सरकार ने छात्रों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों को देखते हुए उनकी सुरक्षा के लिए यह महत्वपूर्ण Guideline तैयार की है। इसमें छात्रों के बातचीत के तरीके और व्यवहार की जांच की जाएगी और उनमें किसी भी असामान्य बदलाव की पहचान की जाएगी। इस Guideline के अनुसार, राज्यों को अब अपने स्कूलों में वेलनेस टीम(Wellness Team) गठित करनी होगी, जिनमें वाइस प्रिंसिपल, हेडमास्टर्स, शिक्षक, छात्र, वार्डन, अभिभावक और काउंसलर शामिल होंगे। इसका उद्देश्य स्कूलों में छात्रों के व्यवहार को मानसिक स्वास्थ्य के पहलु के रूप में देखना और सार्थक समर्थन प्रदान करना है।

छात्रों के व्यवहार से लेकर स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी

इस Guideline के अनुसार, स्कूलों को अपने कैंपस और क्लासरूम में सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देने का काम करना होगा, ताकि कोई भी छात्र अपनी बात रख सके और अपनी चिंताओं को साझा कर सके। इसमें यह भी शामिल है कि स्कूल अब छात्रों की बातचीत के सिग्नल्स को समझकर उन्हें समर्थन दें और जरूरत के मुताबिक उन्हें आगाह करें।

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बातचीत और व्यवहार का महत्व

 शिक्षकों, अभिभावकों, और दोस्तों को छात्रों के व्यवहार के साथ जुड़कर उनकी मनोदसा(Moral)  को समझने की कोशिश करनी चाहिए। बच्चों के व्यवहार में किसी भी संकेत को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यह किसी भी सामाजिक समस्या के पीछे छिपी समस्याओं का संकेत हो सकता है।

तनाव के कारण

आत्महत्या के खतरे को बढ़ाने वाले कई कारण हो सकते हैं, और इनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:

पढ़ाई से जुड़ी प्रतिस्पर्धा: आजकल की तात्कालिक समय की शिक्षा सिस्टम में, छात्रों के लिए प्रतिस्पर्धा(Competition) काफी तीव्र हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप(The Resulting), छात्रों के ऊपर पढ़ाई के दबाव का बोझ पड़ता है।

परिवार और सोसाइटी से की गई दबाव: छात्रों के लिए परिवार और सोसाइटी(Society) के दबाव का भी एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है। उन्हें आपसी तुलना, उनकी उपयोगिता, और अध्ययन के प्रति विशेष अपेक्षाएं(Expectations) निभानी पड़ती हैं, जिससे उन्हें आत्ममूल्यवादी(Self Worth Person) अनुभव हो सकता है।

परीक्षा में कम अंक आना: छात्रों के लिए परीक्षाओं में कम अंक आना भी एक महत्वपूर्ण दबाव हो सकता है। इसके परिण The Resulting, उन्हें खुद को निराश और असफल महसूस हो सकता है।

सामाजिक परियोजनाओं के बीच तुलना: परिवार के द्वितीय बच्चों के साथ तुलना करने से छात्रों को खुद को अपने बड़े भाई बहनों के साथ कम उपयोगी महसूस हो सकता है, जिसका भी दबाव हो सकता है।

शिक्षकों द्वारा Harassed: कुछ छात्र शिक्षकों द्वारा Harassed हो सकते हैं, जिससे उनकी मानसिक Mental Health पर बुरा असर पड़ सकता है।

आर्थिक दिक्कत: कई छात्र आर्थिक दिक्कत का सामना करते हैं, जिसका भी उनके Mental Health पर प्रभाव हो सकता है।

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भारत में आत्महत्या के मामलों में वृद्धि

National Crime Record की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में आत्महत्या करने वाले छात्रों की संख्या में 2011 से 2021 के बीच 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह आंकड़े चिंता की जाने वाली बात है और हम सबको मिलकर इस समस्या का समाधान ढूंढने में मदद करनी चाहिए।

इस परिस्थिति का समाधान: नई Guideline का महत्व

शिक्षा मंत्रालय द्वारा तैयार की गई इस नई Guideline का महत्व बहुत अधिक है, क्योंकि यह छात्रों को उनकी चिंताओं को साझा करने के लिए एक मानसिक स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में स्वीकार करने की मौका देता है।

 इसके अलावा, इस Guideline के माध्यम से स्कूलों को अपने छात्रों के व्यवहार को समझने और समर्थन प्रदान करने की दिशा में कदम बढ़ाने का अवसर मिल जाता है। इससे छात्रों के लिए जीवन में एक बेहतर माहौल बन सकता है और उन्हें उनकी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार कर सकता है।

वेलनेस टीम का महत्व

इस Guideline के तहत, स्कूलों को वेलनेस टीम(Wellness Team) गठित करने की भी जरूरत है, जो छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होगी। यह टीम वाइस प्रिंसिपल, हैडमास्टर्स, शिक्षक, छात्र, वार्डन, अभिभावक और काउंसलर से मिलकर बनी होगी।

 इस टीम का मुख्य कार्य छात्रों के व्यवहार को मनोदसा  में परिवर्तन(Change in Morale) करने के लिए कदम उठाना होगा और उन्हें मानसिक समस्याओं की समय पर पहचान कर सकती है।

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